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अगर सिंधु का पानी रोका, तो खून बहेगा,पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत को धमकी!

Editor : Anjali Mishra | 27 April, 2025

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद बड़ा फैसला लिया है सिंधु जल समझौते को रोकने का।

अगर सिंधु का पानी रोका, तो खून बहेगा,पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत को धमकी!

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अगर सिंधु का पानी रोका, तो खून बहेगा..." पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत को खुलेआम धमकी दे डाली!

सिंध प्रांत के सुक्कुर में एक जनसभा के दौरान बिलावल ने गरजते हुए कहा सिंधु नदी पाकिस्तान की थी, है और हमेशा रहेगी।,ll,,

लेकिन आखिर ये बयान आया क्यों? और भारत-पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर तनाव आखिर किस मोड़ पर है?


अगर सिंधु नदी पर हाथ बढ़ाया... तो खून बहेगा!

ये धमकी पाकिस्तान से आई है — और वह भी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी की जुबानी।

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद बड़ा फैसला लिया है सिंधु जल समझौते को रोकने का।

और अब पाकिस्तान की सियासत में खलबली मची हुई है।

क्या है पूरा मामला? क्या होगा भारत का अगला कदम?

25 अप्रैल को सिंध प्रांत के सुक्कुर इलाके में बिलावल भुट्टो जरदारी ने एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया।

सिंधु नदी के किनारे खड़े होकर उन्होंने भारत को ललकारा।

"मैं सिंधु दरिया के पास खड़े होकर साफ कहना चाहता हूं — सिंधु हमारी थी, है और रहेगी। या तो इस दरिया से हमारा पानी बहेगा, या फिर खून बहेगा उनका, जो हमारी हिस्सेदारी छीनना चाहते हैं।"


बिलावल ने कहा — भारत चाहे जितनी भी आबादी का देश हो, लेकिन सिंधु पर हक पाकिस्तान का है।

उन्होंने पाकिस्तान की फौज को तैयार बताया और सिंधु घाटी की सभ्यता की विरासत को अपना बताया।तो साफ है बिलावल सिर्फ पानी की बात नहीं कर रहे, बल्कि उसे पाकिस्तान की अस्मिता और अस्तित्व से जोड़ रहे हैं।साल 1960 भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐतिहासिक करार हुआ था सिंधु जल संधि।

विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते के तहत, भारत को 3 पूर्वी नदियों (रवि, ब्यास, सतलुज) का पानी मिला और पाकिस्तान को 3 पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का।

इस संधि को अब तक भारत ने निभाया है भले ही पाकिस्तान ने कई बार युद्ध या आतंकी हमले किए हों।

लेकिन अब हालात बदल गए हैं।


22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी।

इनमें ज्यादातर पर्यटक थे।

इस बर्बर हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया।

23 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक हुई।

गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर मौजूद थे।

बैठक के बाद फैसला हुआ सिंधु जल संधि को सस्पेंड किया जाएगा।यानि अब भारत उन नदियों के पानी को भी रोक सकता है, जो अब तक पाकिस्तान को मिल रहा था।

भारत के इस फैसले ने पाकिस्तान में सियासी भूचाल ला दिया है।


बिलावल भुट्टो का बयान उसी बेचैनी की गवाही है।

पाकिस्तानी मीडिया से लेकर सियासी हलकों तक एक ही चर्चा है। अगर पानी बंद हुआ तो पाकिस्तान की खेती, बिजली, और पीने के पानी पर गंभीर संकट आ जाएगा।पानी के मुद्दे पर भारत का हाथ बहुत मजबूत है।

सिंधु जल समझौते में भारत को अपनी नदियों पर संरचनात्मक काम करने का अधिकार है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकतम उपयोग कर सकता है। डैम बनाकर, नहरें बनाकर या पानी को डायवर्ट करके।

इसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा। खेती से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी तक।


तो सवाल ये है।भारत आगे किस स्तर तक जाएगा? क्या पाकिस्तान वाकई युद्ध की धमकी देने की हालत में है?बिलावल भुट्टो ने सिंधु घाटी सभ्यता का हवाला दिया।

उन्होंने कहा मोदी खुद को हड़प्पा-मोहनजोदड़ो का वारिस बताते हैं, लेकिन असली वारिस पाकिस्तान के लोग हैं।

हालांकि इतिहास कुछ और कहता है।सिंधु घाटी सभ्यता दोनों देशों की साझा विरासत है।

भारत में भी हड़प्पा, लोथल और धोलावीरा जैसे साइट्स आज भी मौजूद हैं।संस्कृति और सभ्यता किसी एक देश की बपौती नहीं होती।

पाकिस्तान में इस वक्त विपक्ष और सत्ता दोनों पानी के मुद्दे पर सियासत चमकाने में जुटे हैं।


बिलावल भुट्टो भले ही जनसभा में गरजे हों, लेकिन असल में उनकी पार्टी की सरकार ही भारत के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कुछ ठोस करने में नाकाम रही है।

कई विश्लेषकों का कहना है कि बिलावल का यह भड़काऊ बयान देश के अंदर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की एक कोशिश है।

भारत अब अपनी पाकिस्तान नीति में एक बड़ा बदलाव कर रहा है।अब तक जहां आतंकी घटनाओं के बाद सैन्य जवाब प्राथमिकता थी, अब पानी को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की सोच बन रही है।डिप्लोमैट्स का कहना है। सिंधु जल समझौते पर रोक लगाना पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव डालने की ऐसी चाल है, जो बिना गोली चले असर दिखा सकती है।

पाकिस्तान पहले ही भीषण आर्थिक संकट से गुजर रहा है।


आईएमएफ से राहत पैकेज की गुहार, डॉलर की भारी कमी, और महंगाई आसमान पर है।

ऐसे में अगर सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी रुकता है या उसमें कटौती होती है, तो पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार होगा गेहूं, धान और कपास की फसलें बर्बाद हो सकती हैं।

कई लोगों के मन में सवाल है क्या भारत इस समझौते को पूरी तरह खत्म कर सकता है?

तकनीकी रूप से, हां भारत चाहे तो अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत संधि को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि आतंकी हमलों और लगातार युद्ध जैसे हालात 'Material Breach' की कैटेगरी में आते हैं, जो समझौते को समाप्त करने का आधार बन सकते हैं।

अगले कुछ हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण होंगे।


भारत अगर तेजी से अपने नदी प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करता है तो पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़नी तय हैं।

हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय ताकतें, खासतौर पर विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र, दोनों देशों को बातचीत की टेबल पर लाने की कोशिश भी कर सकती हैं।

लेकिन अब की बार भारत का रुख बेहद साफ नजर आ रहा है 'आतंक रुकेगा, तभी पानी बहेगा।'

तो साफ है अब भारत और पाकिस्तान के बीच सिर्फ सरहदों पर नहीं, नदियों पर भी जंग छिड़ चुकी है।बिलावल भुट्टो की धमकियां अपनी जगह, लेकिन भारत का फैसला रणनीतिक है।


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