उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन: मनरेगा और कानून व्यवस्था पर घेराव
Editor : 24 Adda Official | 17 February, 2026
आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) और राज्य में कानून व्यवस्था के मुद्दों पर था। कांग्रेस का कहना है कि सरकार मनरेगा को कमजोर कर रही है
Source or Copyright Disclaimer
सबसे पहले बात करते हैं मनरेगा की। मनरेगा एक ऐसी योजना है जो ग्रामीण इलाकों में गरीब लोगों को साल में 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी देती है। यह योजना 2005 में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने शुरू की थी। इसका मकसद था कि गांवों में बेरोजगारी कम हो और लोग अपने इलाके में ही काम करके पैसा कमा सकें। लेकिन अब कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार इस योजना को कमजोर कर रही है। वे कहते हैं कि मजदूरों की मजदूरी 11-12 महीनों से रुकी हुई है, योजना का नाम बदलने की कोशिश हो रही है और इसे खत्म करने की साजिश रची जा रही है। इससे ग्रामीण इलाकों में गरीबी बढ़ रही है और लोग परेशान हैं। कांग्रेस ने इसे "मनरेगा बचाओ अभियान" नाम दिया है और पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर रही है। उत्तर प्रदेश में यह अभियान आज विधानसभा घेराव के रूप में सामने आया
लखनऊ में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कार्यकर्ताओं को इकट्ठा किया। वे सभी विधानसभा की तरफ कूच कर रहे थे। उनका प्लान था कि विधानसभा को घेरकर सरकार के खिलाफ नारे लगाएं और अपनी मांगें रखें। लेकिन पुलिस ने पहले से ही बैरिकेडिंग लगा रखी थी। जैसे ही कार्यकर्ता विधानसभा के पास पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान कुछ धक्का-मुक्की भी हुई। कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ता नारे लगा रहे हैं और पुलिस उन्हें रोक रही है। अजय राय ने कहा कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन सरकार दबाव में आकर कार्यकर्ताओं को रोक रही है।
इस प्रदर्शन में सिर्फ मनरेगा का मुद्दा नहीं था। कांग्रेस ने कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में अपराध बढ़ रहे हैं, महिलाओं के खिलाफ घटनाएं हो रही हैं और सरकार कुछ नहीं कर रही। इसके अलावा, मार्केट डेमोलिशन (बाजार तोड़ने) का मुद्दा भी उठाया गया। जैसे कि दाल मंडी जैसी जगहों को तोड़ा जा रहा है, जिससे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार गरीबों, मजदूरों और महिलाओं का अपमान कर रही है। उन्होंने शंकराचार्य और माता अहिल्याबाई होलकर जैसे ऐतिहासिक व्यक्तियों का भी जिक्र किया, कहते हुए कि सरकार उनकी विरासत को नजरअंदाज कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई की बात करें तो कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया गया। कुछ को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस का कहना है कि यह लोकतंत्र की हत्या है। अजय राय ने कहा कि कार्यकर्ता पूरे राज्य से आए थे और वे बड़ी संख्या में विधानसभा घेराव करने वाले थे। लेकिन पुलिस की भारी तैनाती ने उन्हें रोक दिया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया था, लेकिन कोई बड़ा हंगामा नहीं हुआ। कांग्रेस ने इसे सरकार की कमजोरी बताया और कहा कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
यह प्रदर्शन क्यों महत्वपूर्ण है? उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है और यहां की राजनीति पूरे देश को प्रभावित करती है। 2027 में लोकसभा चुनाव आने वाले हैं, इसलिए विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सरकार पर हमला तेज कर रही हैं। समाजवादी पार्टी ने भी विधानसभा में एसआईआर (स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन) जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए। लेकिन कांग्रेस का फोकस ग्रामीण मुद्दों पर है, क्योंकि मनरेगा से लाखों लोग जुड़े हैं। अगर मजदूरी नहीं मिलती, तो गांवों में असंतोष बढ़ता है। कांग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बना रही है, ताकि गरीब वोटरों को अपनी तरफ खींच सके।